Mutual fund उन निवेशकों से फंड लेता है जिनको शेयर बाजार के बारे में जानकारी नहीं है या कम है लेकिन वे निवेश करना चाहते हैं। Mutual fund company छोटे-बड़े निवेशकों से पैसे ले कर उसे विभिन्न जगहों पर जैसे इक्विटी, बॉन्ड, गोल्ड आदि में निवेश करते हैं तथा निवेश से मिलने वाले retrun को सभी निवेशकों में उनके निवेश के अनुपात में बांट देते है। इससे निवेशकों को लाभ या हानि होता है जो उस Mutual fund के फंड मैनेजर के विवेक पर निर्भर है। इस फंड को AMC द्वारा नियुक्त फंड मैनेजर मैनेज करते हैं।
एैसेट मैनेजमेंट कंपनी(AMC) क्या है ?
भारत में बहुत सी Mutual fund companies चल रही हैं। इन Mutual fund companies को Asset Management Company या उसे AMC भी कहते हैं। ये कंपनियां SEBI में रजिस्टर्ड होती है, जो mutual fund स्कीम बनाती हैं और निवेशकों से पैसा जमा करती है।ऐसी कंपनियां विभिन्न निवेशकों के द्वारा जमा किए गए फंडों को विभिन्न जगहों जैसे इक्विटी, बॉन्ड, गोल्ड, आदि में निवेश करती हैं और इस निवेश से मिलने वाले रिटर्न को निवेशकों में फंड यूनिट्स के अनुसार बांट देती हैं. यही कंपनी फंड मैनेजर (Fund Manager) को भी नियुक्त करती हैं। जो उस फंड को मैनेज करते हैं।
म्यूचुअल फंड के प्रकार
1.इक्विटी फंड (Equity Fund)
इक्विटी फंड अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी एक्सपोज़र ज्यादा रखते हैं और शेयरों और स्टॉक्स इन्वेस्ट करते हैं इसका उद्देश्य अधिक धन या अधिक retrun कमाना होता है और बाकी जैसे debt और gold निवेश कम करते हैं।
2.डेट फंड ( Debt Fund)
Debt fund में mutual funds सरकारी बॉन्ड और प्राइवेट बॉन्ड में निवेश करते हैं जिससे रिस्क कम से कम हो और निवेशक को अच्छा retruns मिले। इसमें इक्विटी में बहुत कम इन्वेस्ट किया जाता है।
3.टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (ELSS)
इनकम टैक्स को ध्यान में रखते हुए Mutual funds equity linked saving scheme (ELSS) निकालते हैं इसमें निवेशकों को सरकार सेशन 80 C के तहत टैक्स में छूट देता है। इन Mutual funds में 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है।
4.बैलेंस्ड म्युचुअल फंड ( Balanced Mutual Fund
बैलेंस्ड म्युचुअल फंड में जोखिम को कम करने के लिए एक निश्चित अनुपात इक्विटी फंड और डेट फंड में निवेश किया जाता है। जिससे कि निवेशक को अच्छा रिटर्न मिले और हानि कम हो।
5.इंडेक्स फंड (Index Fund)
Index fund किसी इंडेक्स को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है और निवेशकों के सारा पैसा उस इंडेक्स के स्टॉक्स में ही लगाया जाता है। जैसे- निफ्टी 50 इंडेक्स फंड इसमें निवेशकों के हितों को ध्यान रख कर सिर्फ निफ्टी 50 के शेयरों में ही पैसे लगते हैं। और अच्छा रिटर्न कमाते हैं।
NAV क्या है?
म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत को Net Asset Value (NAV) कहते हैं। हर दिन का NAV बाजार के भाव ऊपर नीचे होने के कारण कम ज्यादा होता रहता है। इससे निवेशकों को लाभ और हानि का पता चलता रहता है।
NFO या न्यू फंड ऑफर क्या है?
Mutual fund कम्पनी AMC द्वारा समय-समय पर नई-नई म्यूचुअल फंड स्कीमें लांच की जाती हैं। market में किसी नई म्यूचुअल फंड स्कीम के लांच करने को(NFO)New fund offer कहा जाता है। प्रत्येक नए फंड को एक नए नाम दिया जाता है।
डायरेक्ट (Direct )और रेगुलर (regular) प्लान
किसी mutual fund में निवेशक द्वारा डायरेक्ट निवेश किया जाता है इस में AMC का कोई रोल नहीं होता है तथा इसमें कोई कमीशन या चार्ज नहीं देना पड़ता है Direct plan में रेगुलर प्लान के मुकाबले NAV ज्यादा होता है और retrun भी ज्यादा मिलता है।
Regular plan में AMC निवेशकों के फंड को मैनेज करता है इसमें निवेशक कुछ नहीं करता है रेगुलर प्लान में निवेशक को कमीशन या चार्ज देना पड़ता है इसका प्रभाव retrun पर पड़ता और डायरेक्ट प्लान की तुलना में कम retrun मिलते हैं।
Mutual fund में निवेश कैसे करें ?
Mutual funds में निवेश करने के लिए निवेशक सेबी द्वारा रजिस्टर्ड किसी भी AMC company या किसी बैंक में जा कर डिमैट अकाउंट खोलकर सकते हैं अथवा इन बैंक, AMC company के website में जा कर ऑनलाइन भी डिमैट अकाउंट खोल कर अपना इन्वेस्टमेंट सिप (SIP)और एकमुश्त (Lump Sum)राशि के माध्यम से अपना इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं।
SIP और Lump sum
SIP(Systematic investment plan) के द्वारा आप 100,500 या 1000 रुपए से निवेश शुरु कर सकते हैं। SIP पैसे बचाने के लिए सबसे अच्छा रास्ता है इससे निवेशकों को अच्छा retrun मिलता है और इससे निवेशकों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है।
एकमुश्त (Lump Sum) निवेश का अर्थ है कि निवेशक को अपनी पूंजी एक ही बार में निवेश करना होता है और आवश्यकता पड़ने पर ही दोबारा पूंजी लगाता है यानी टॉप अप करता है। उसे हर महीने या साल निवेश करने की जरूरत नहीं होती है और इससे निवेशक को अच्छा retruns मिलते हैं।
टैक्स (Tax) लगता है या नहीं
Mutual fund कंपनियां टैक्स देने वाले निवेशकों के लिए ELSS mutual fund निकालते हैं जिसमें अधिकतम 150000/- तक सेक्शन 80c के तहत टैक्स में छूट मिलता है। इसमें निवेशक पैसे निवेश कर इसका लाभ ले सकते हैं।
म्यूचुअल फंड के लाभ
• FD, RD जैसे Savings account से ज्यादा रिटर्न मिलता है।
• छोटे राशि से भी इन्वेस्ट शुरू कर सकते हैं।
• विविधता (Diversified )के कारण नुकसान कम और फायदा ज्यादा होता है।
• Mutual fund उपयोग में आसान होता है।
• ELSS mutual fund में 80c के तहत टैक्स में छूट मिलता है।
म्यूचुअल फंड के नुकसान
• Mutual fund में retrun fix नहीं मिलते हैं।
• एग्जिट लोड (Exit load ) लगता है।
• लॉक इन पीरियड (lock-in-period) के कारण जरूरत होने पर पैसे नहीं निकाल सकते हैं।
• शेयर बाजार(Share Market) से कम retrun मिलता है।
• एक्सपेंस रेशिओ(Expense ratio) होता है। जिससे रिटर्न कम हो जाते है।
निष्कर्ष -
जो लोग समय के अभाव या जानकारी की कमी के कारण शेयर बाजार में डायरेक्ट निवेश करना नहीं चाहते हैं और अपने पैसे से अधिक धन या रिटर्न चाहते हैं उन लोगों के लिए Mutual fund एक अच्छा विकल्प है। और वे mutual funds में निवेश कर अच्छा रिटर्न पा सकते हैं।
